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भूकंप आने का सबसे पहले किसे और कैसे पता चलता है? जानिए कैसे मापी जाती है तीव्रता

भूकंप आने का सबसे पहले किसे और कैसे पता चलता है? जानिए कैसे मापी जाती है इसकी तीव्रता


भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जो अचानक आती है और बड़े पैमाने पर नुकसान कर सकती है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भूकंप आने का सबसे पहले पता किसे चलता है और इसे कैसे मापा जाता है?
आइए जानते हैं भूकंप की पहचान और इसकी तीव्रता मापने की प्रक्रिया के बारे में।


भूकंप का सबसे पहले पता भूकंपमापी केंद्रों (Seismological Centers) को चलता है।
ये केंद्र विशेष यंत्रों, जिन्हें सिस्मोग्राफ (Seismograph) कहा जाता है, का इस्तेमाल करते हैं।

  • सिस्मोग्राफ जमीन में होने वाले हल्के-से-हल्के कंपन को भी दर्ज कर सकता है।
  • यह कंपन की दिशा, गति और समय रिकॉर्ड करता है।
  • कई देशों में अर्ली वार्निंग सिस्टम भी लगाए गए हैं जो कुछ सेकंड पहले चेतावनी दे सकते हैं।

भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल (Richter Scale) पर मापा जाता है।

  • रिक्टर स्केल की रेंज 0 से 10 तक होती है।
  • 0-4 तीव्रता वाला भूकंप हल्का माना जाता है और अक्सर लोग इसे महसूस भी नहीं करते।
  • 5-6 तीव्रता वाला भूकंप इमारतों को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • 7 या उससे अधिक तीव्रता वाला भूकंप बेहद खतरनाक होता है।

  • रिक्टर स्केल कंपन की ऊर्जा को मापता है।
  • मैग्नीट्यूड भूकंप के वास्तविक आकार या ऊर्जा को दर्शाता है।

  • जापान और अमेरिका जैसे देशों में इतने संवेदनशील उपकरण हैं कि वे इंसानों के महसूस करने से पहले ही भूकंप का पता लगा लेते हैं।
  • कुछ समुद्री भूकंप (Tsunami के कारण बनने वाले) का पता सुनामी चेतावनी केंद्र को पहले से लग जाता है।

भूकंप का सबसे पहले पता वैज्ञानिक उपकरणों और अर्ली वार्निंग सिस्टम को चलता है।
सही तकनीक और जानकारी के जरिए हम भूकंप के नुकसान को कम कर सकते हैं, लेकिन इसे रोकना अभी भी संभव नहीं है।

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