अरावली में अब नए खनन की इजाजत नहीं, संरक्षित क्षेत्र का भी होगा विस्तार
विवाद के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला
भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला अरावली पर्वतमाला को लेकर केंद्र सरकार ने एक अहम और दूरगामी फैसला लिया है। अब अरावली क्षेत्र में नए खनन (Mining) को अनुमति नहीं दी जाएगी, साथ ही संरक्षित (Protected) क्षेत्र का दायरा भी बढ़ाया जाएगा। यह निर्णय लंबे समय से चल रहे पर्यावरणीय विवाद, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और बढ़ते पर्यावरणीय संकट के बीच लिया गया है।
🔴 क्या है केंद्र सरकार का फैसला?
केंद्र सरकार के ताजा निर्णय के अनुसार—
- अरावली क्षेत्र में किसी भी नए खनन प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
- पहले से घोषित संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार किया जाएगा।
- पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील जोन (ESZ) में कड़ी निगरानी लागू होगी।
- अवैध खनन पर राज्यों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का कहना है कि अरावली का संरक्षण केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पर्यावरण सुरक्षा से जुड़ा विषय है।
🌿 अरावली क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
अरावली पर्वतमाला राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात तक फैली हुई है। इसका महत्व कई स्तरों पर है—
- मरुस्थलीकरण रोकने में मदद: अरावली, थार रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोकती है।
- भूजल संरक्षण: यह क्षेत्र जलस्तर बनाए रखने में सहायक है।
- जैव विविधता: यहां कई दुर्लभ वनस्पति और जीव-जंतु पाए जाते हैं।
- दिल्ली-NCR की हवा: अरावली हरियाली प्रदूषण और धूल को कम करने में बड़ी भूमिका निभाती है।
⚖️ विवाद और पृष्ठभूमि
पिछले कुछ वर्षों में अरावली क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर कई बार विवाद खड़ा हुआ।
- पर्यावरणविदों ने इसे प्राकृतिक आपदा को न्योता बताया।
- कई सामाजिक संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर कीं।
- अदालतों ने भी समय-समय पर खनन पर रोक लगाने के आदेश दिए।
इन्हीं सब दबावों और रिपोर्ट्स के बाद केंद्र सरकार ने यह निर्णायक कदम उठाया है।
🏞️ संरक्षित क्षेत्र के विस्तार का क्या मतलब?
संरक्षित क्षेत्र के विस्तार का अर्थ है—
- अधिक भूमि को वन एवं पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत लाया जाएगा।
- इन इलाकों में निर्माण, खनन और औद्योगिक गतिविधियां सीमित होंगी।
- वन विभाग और पर्यावरण एजेंसियों की भूमिका मजबूत होगी।
इससे भविष्य में अरावली क्षेत्र को होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
🌍 पर्यावरण विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि—
- यह फैसला जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मददगार होगा।
- आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रहेगी।
- दिल्ली-NCR समेत आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरणीय संतुलन बेहतर होगा।
हालांकि, कुछ उद्योग संगठनों ने रोजगार और अर्थव्यवस्था पर असर की चिंता भी जताई है।
🔎 आगे क्या?
अब नजर इस बात पर होगी कि—
- राज्य सरकारें इस फैसले को कितनी सख्ती से लागू करती हैं।
- अवैध खनन पर वास्तविक कार्रवाई होती है या नहीं।
- संरक्षित क्षेत्र के विस्तार से जमीनी स्तर पर कितना बदलाव आता है।
✍️ निष्कर्ष
अरावली में नए खनन पर रोक और संरक्षित क्षेत्र के विस्तार का फैसला पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि इसे ईमानदारी से लागू किया गया, तो यह न केवल अरावली को बचाएगा बल्कि देश के पर्यावरणीय भविष्य को भी सुरक्षित करेगा।
आपकी राय क्या है? क्या यह फैसला पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन बना पाएगा? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।