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कर्नाटक के Kelvin Aranha और Farish Anfal ने इंजीनियरिंग छोड़ AI आधारित हाइड्रोपोनिक खेती शुरू की और आज लाखों कमा रहे हैं। जानिए इनकी पूरी सफलता की कहानी।
शुरुआत कहां से हुई?
“इंजीनियरिंग कर लो, फिर पैसा ही पैसा होगा” – यह लाइन हम सभी ने कभी न कभी सुनी है। लेकिन, पैसा कमाने के लिए इंजीनियरिंग ही जरूरी हो ऐसा नहीं है। कर्नाटक के उडुपी के Kelvin Aranha और Farish Anfal इसका बेहतरीन उदाहरण हैं।
दोनों ने मैंगलोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग (MITE) से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। Kelvin पढ़ाई के बाद बेंगलुरु में नौकरी करने लगे और Farish ने एक छोटा सा सी-फूड बिजनेस शुरू किया। इसी दौरान Farish को किसानों की मुश्किलों का पता चला – खासकर जलवायु परिवर्तन और महंगे कीटनाशकों की वजह से होने वाले नुकसान के बारे में।
आधुनिक खेती का आइडिया कैसे आया?
Kelvin और Farish अक्सर किसानों की समस्याओं पर चर्चा करते थे और दोनों का सपना था कि खेती को मुनाफे वाला बनाया जाए।
साल 2021 में Kelvin ने नौकरी छोड़ दी और दोनों ने उडुपी में एक छोटा फ्लैट किराए पर लेकर खेती का प्रोटोटाइप तैयार किया। 4 महीने बाद इन्होंने Krop AI नाम से कंपनी शुरू की।
कैसी है इनकी खेती?
ये दोनों हाइड्रोपोनिक्स (Hydroponics) तकनीक से फसल उगाते हैं, जिसमें मिट्टी की जगह पानी और पोषक तत्वों का इस्तेमाल होता है।
कर्नाटक के ब्रह्मवरा में इन्होंने एक वर्टिकल फार्म बनाया है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से लेट्यूस, तुलसी, केल और पार्सले जैसी फसलें उगाई जाती हैं – जो भारत में आमतौर पर नहीं होतीं।
पारंपरिक खेती से क्या फर्क है?
- 95% पानी की बचत – हाइड्रोपोनिक्स में पानी को दोबारा इस्तेमाल किया जाता है।
- 50% लागत कम – क्योंकि कीटनाशकों और मौसम पर निर्भरता घट जाती है।
- कंट्रोल्ड एनवायरनमेंट – कृत्रिम रोशनी और तापमान नियंत्रण से फसल मौसम से प्रभावित नहीं होती।
AI कैसे करता है मदद?
Krop AI का सिस्टम:
- सिंचाई का समय और मात्रा तय करता है।
- तापमान, नमी, pH लेवल, पानी की गुणवत्ता को मॉनिटर करता है।
- पौधों के लिए खास LED लाइट का इस्तेमाल करता है, जो सिर्फ वही तरंगें (600–700 nm) देती हैं जो फोटोसिंथेसिस के लिए जरूरी हैं।
कमाई का मॉडल
- पारंपरिक खेती में 1 किलो स्ट्रॉबेरी उगाने में लगभग ₹800 लगते हैं, लेकिन AI आधारित हाइड्रोपोनिक्स में यह खर्च सिर्फ ₹300 होता है।
- इनका एक सेटअप ₹5 लाख में बनता है, जिसमें एक बार में 500 लेट्यूस पौधे उगाए जा सकते हैं।
- अब तक ये 10 से ज्यादा एग्री-आंत्रप्रेन्योर्स और कंपनियों के लिए फार्म बना चुके हैं।
मुनाफा कितना?
साल 2023 में Kelvin और Farish ने अपने फार्म स्टेशनों से ₹50 लाख की कमाई की, यानी हर महीने औसतन ₹4 लाख से ज्यादा। इस पर इन्हें लगभग 40% का नेट प्रॉफिट हुआ।
सीख क्या है?
Kelvin और Farish साबित करते हैं कि अगर सोच नई हो और तकनीक का सही इस्तेमाल किया जाए तो खेती भी करोड़ों का बिजनेस बन सकती है। इंजीनियरिंग की डिग्री से ज्यादा मायने रखती है दृष्टि, मेहनत और इनोवेशन।